0
Posted by PALASH KI BAHAAR on 7:39 am


सोनल पाण्डेय की पेंटिंग पर तवरित टिपण्णी 

मै रही उम्र भर हिज़ाब में ए खुदा
मेरी बेटी की आँखों में भविष्य के सपने हे,
वो ताकती हे मेरी ओर
की जियेगी क्या मुझ जैसा जीवन,
बैठी हे मेरी गोद में अपने वजूद के साथ
अपनी गुदगुदी नन्ही टांगो के साथ
आशंकित हो रही हे इस समाज से
जिसने दामिनी की टांगो को रक्त से भर दिया
इस समाज में बड़ी होने से डर रही हे वो
मेरे खुदा इसे बचा ,इसके सपनो को बचा ,
इसके समय को बचा ,इसके समाज को बचा

0

आपका स्वागत है

Posted by PALASH KI BAHAAR on 8:36 am in
पगदंडी ब्लॉग में आपका स्वागत है 

Copyright © 2009 हस्तक्षेप All rights reserved. Theme by Laptop Geek. | Bloggerized by FalconHive | Distributed by Deluxe Templates