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Posted by PALASH KI BAHAAR
on
7:39 am

सोनल पाण्डेय की पेंटिंग पर तवरित टिपण्णी
मै रही उम्र भर हिज़ाब में ए खुदा
मेरी बेटी की आँखों में भविष्य के सपने हे,
वो ताकती हे मेरी ओर
की जियेगी क्या मुझ जैसा जीवन,
बैठी हे मेरी गोद में अपने वजूद के साथ
अपनी गुदगुदी नन्ही टांगो के साथ
आशंकित हो रही हे इस समाज से
जिसने दामिनी की टांगो को रक्त से भर दिया
इस समाज में बड़ी होने से डर रही हे वो
मेरे खुदा इसे बचा ,इसके सपनो को बचा ,
इसके समय को बचा ,इसके समाज को बचा

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